वाघा बॉर्डर: पाकिस्तान की जेल में तीन दशक से बंद सुरजीत सिंह आज अपने देश लौट आएंगे। सुरजीत को लाहौर की कोटलखपत जेल से रिहा कर दिया गया है जहां से उन्हें वाघा बॉर्डर लाकर भारतीय अधिकारियों को सौंप दिया जाएगा।
गौरतलब है कि जासूसी के आरोप में सुरजीत को पाकिस्तान की अदालत ने फांसी की सजा सुनाई थी, जिसे बाद में उम्रकैद में बदल दिया गया था। सुरजीत की रिहाई को लेकर उसका परिवार काफी उत्साहित है और उन्हें लेने के लिए वाघा बार्डर के लिए निकल चुका है।
सुरजीत को पाकिस्तान के सैन्य शासक जिया उल हक के शासनकाल के दौरान जासूसी के आरोपों में पाकिस्तानी पुलिस द्वारा गिरफ्तार किया गया था। 1985 में पाकिस्तान सेना कानून के तहत सुरजीत सिंह को मृत्युदंड दिया गया था, लेकिन 1989 में तत्कालीन राष्ट्रपति गुलाम इशाक खान ने उनकी मौत की सजा को उम्रकैद में बदल दिया था।
सूत्रों ने कहा कि सुरजीत ने बुधवार को कोट लखपत जेल में अन्य कैदियों से मुलाकात की, जहां उन्हें विदाई दी गई। सूत्रों ने कहा कि सिंह ने अधिकारियों से कहा कि उनकी रिहाई के जश्न के तौर पर उन्हें सेवइयां दी जाएं। अधिकारियों ने कहा कि सिंह की स्वदेश वापसी के अलावा 315 भारतीय मछुआरों को बुधवार को कराची की जेल से रिहा किया गया। मछुआरों को सद्भावना के तौर पर रिहा किया गया।
भारतीय नागरिक सरबजीत सिंह के रिहा होने की खबर आने के कुछ घंटों बाद मंगलवार को राष्ट्रपति के प्रवक्ता ने स्पष्ट किया था कि अधिकारियों ने सरबजीत नहीं, बल्कि सुरजीत के रिहाई के आदेश दिए।
सुरजीत के गांव फिड्डे में बुधवार से ही उत्सव जैसा माहौल है। उनके परिवार ने कहा कि यह उनके लिए एक सपना था, जो सच हो गया। सुरजीत की पत्नी हरबन कौर ने कहा कि यह उनके परिवार के लिए बड़ी खबर है।
पाकिस्तान में सुरजीत के वकील असमेश शेख ने यह समाचार उनकी सबसे बड़ी बेटी परमिंदर कौर को दिया। सुरेवाला गांव में अपने पति के साथ रहने वाली परमिंदर कौर भी फिड्डे गांव में जश्न में शामिल हुईं। जैसे ही समाचार फैला, आसपास के क्षेत्रों और पंचायतों के लोग इस परिवार के घर पहुंचने लगे। सुरजीत की बड़ी बहन गुरदीप कौर भी भुटिवाला फरीदकोट से फिड्डे गांव पहुंचीं, जहां सुबह से ही रिश्तेदार पहुंचने शुरू हो गए थे।
भारत और पाकिस्तान की सरकारों का शुक्रिया अदा करते हुए परमिंदर कौर और उसकी मां हरबन कौर ने कहा कि यह दिन उनके परिवार के लिए सबसे खास दिन है। सुरजीत की दो बेटियां- परमिंदर कौर और रानी कौर तथा एक बेटा कुलविंदर सिंह उर्फ टिक्कू है।
(इनपुट एजेंसियों से भी)
गौरतलब है कि जासूसी के आरोप में सुरजीत को पाकिस्तान की अदालत ने फांसी की सजा सुनाई थी, जिसे बाद में उम्रकैद में बदल दिया गया था। सुरजीत की रिहाई को लेकर उसका परिवार काफी उत्साहित है और उन्हें लेने के लिए वाघा बार्डर के लिए निकल चुका है।
सुरजीत को पाकिस्तान के सैन्य शासक जिया उल हक के शासनकाल के दौरान जासूसी के आरोपों में पाकिस्तानी पुलिस द्वारा गिरफ्तार किया गया था। 1985 में पाकिस्तान सेना कानून के तहत सुरजीत सिंह को मृत्युदंड दिया गया था, लेकिन 1989 में तत्कालीन राष्ट्रपति गुलाम इशाक खान ने उनकी मौत की सजा को उम्रकैद में बदल दिया था।
सूत्रों ने कहा कि सुरजीत ने बुधवार को कोट लखपत जेल में अन्य कैदियों से मुलाकात की, जहां उन्हें विदाई दी गई। सूत्रों ने कहा कि सिंह ने अधिकारियों से कहा कि उनकी रिहाई के जश्न के तौर पर उन्हें सेवइयां दी जाएं। अधिकारियों ने कहा कि सिंह की स्वदेश वापसी के अलावा 315 भारतीय मछुआरों को बुधवार को कराची की जेल से रिहा किया गया। मछुआरों को सद्भावना के तौर पर रिहा किया गया।
भारतीय नागरिक सरबजीत सिंह के रिहा होने की खबर आने के कुछ घंटों बाद मंगलवार को राष्ट्रपति के प्रवक्ता ने स्पष्ट किया था कि अधिकारियों ने सरबजीत नहीं, बल्कि सुरजीत के रिहाई के आदेश दिए।
सुरजीत के गांव फिड्डे में बुधवार से ही उत्सव जैसा माहौल है। उनके परिवार ने कहा कि यह उनके लिए एक सपना था, जो सच हो गया। सुरजीत की पत्नी हरबन कौर ने कहा कि यह उनके परिवार के लिए बड़ी खबर है।
पाकिस्तान में सुरजीत के वकील असमेश शेख ने यह समाचार उनकी सबसे बड़ी बेटी परमिंदर कौर को दिया। सुरेवाला गांव में अपने पति के साथ रहने वाली परमिंदर कौर भी फिड्डे गांव में जश्न में शामिल हुईं। जैसे ही समाचार फैला, आसपास के क्षेत्रों और पंचायतों के लोग इस परिवार के घर पहुंचने लगे। सुरजीत की बड़ी बहन गुरदीप कौर भी भुटिवाला फरीदकोट से फिड्डे गांव पहुंचीं, जहां सुबह से ही रिश्तेदार पहुंचने शुरू हो गए थे।
भारत और पाकिस्तान की सरकारों का शुक्रिया अदा करते हुए परमिंदर कौर और उसकी मां हरबन कौर ने कहा कि यह दिन उनके परिवार के लिए सबसे खास दिन है। सुरजीत की दो बेटियां- परमिंदर कौर और रानी कौर तथा एक बेटा कुलविंदर सिंह उर्फ टिक्कू है।
(इनपुट एजेंसियों से भी)


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